बालोद। सामाजिक कुरीतियों और दिखावे की चकाचौंध से हटकर बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक अंतर्गत ग्राम टेकाडोढ़ा में महरा समाज ने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांव में ठेका विवाह पद्धति के तहत शादी संपन्न कर परिजनों ने न सिर्फ फिजूलखर्ची से दूरी बनाई, बल्कि समाज के लिए एक नई सोच को भी जन्म दिया।
टेकाडोढ़ा निवासी रामेश्वर उंदरा (40) और ग्राम फरदडीह निवासी माधुरी सहारे (38) का विवाह ठेका पद्धति से सादगीपूर्ण वातावरण में हुआ। वर्षों से जीवनसाथी की तलाश कर रहे इस जोड़े को माधुरी के जीजा दीपक आरदे के माध्यम से एक-दूसरे का साथ मिला। रामेश्वर बालोद के एक भोजनालय में कार्यरत रहते हुए सामाजिक भवन में ही ठहरते थे, वहीं दीपक आरदे सामाजिक आयोजनों के चलते अक्सर बालोद आते रहते थे। इसी दौरान दोनों के बीच यह रिश्ता तय हुआ।
इस विवाह में ना बैंड-बाजा, ना बारात और ना ही भव्य पंडाल। वधू पक्ष स्वयं वर के घर पहुंचा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ एक ही दिन में सात फेरे लेकर नवदंपति ने गृहस्थ जीवन की शुरुआत की।
वर और वधू दोनों की उम्र पारंपरिक विवाह की आम आयु से ऊपर थी, जिससे रिश्ते तय होने में बाधाएं आ रही थीं। लेकिन कहते हैं, "जो जोड़ियां ऊपर बनती हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता।" रामेश्वर और माधुरी की यह जोड़ी उसी सत्य की मिसाल बन गई।
विवाह में राजेंद्र यारदा, शिवप्रसाद कौशल, कुबेर यारदा, जीवन कोटेंद्र, योगेंद्र कौशल, शारदा कौशल, कुसुम आरदे, कौशल्या डोंगरे सहित समाज के अन्य प्रमुख जन उपस्थित रहे। वधू के पिता सेउक राम सहारे ने कहा, "मैंने अपनी बेटी के हाथ पीले कर आज पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पूरी की।"
वहीं, वर पक्ष से राजेश कुमार उंदरा, छगन बुंदेली, कचराबाई डेरहा राम समेत परिजनों ने विवाह को सहयोग प्रदान किया। पारंपरिक बाजे की स्वर लहरियों के बीच विवाह घर पर ही शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।

