राजनांदगांव। जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती किरण साहू ने प्रेस नोट जारी करते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल ही में सामने आए घटनाक्रम की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि जेएनयू में कथित रूप से देश विरोधी नारे लगाए जाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह को लेकर आपत्तिजनक नारेबाजी की खबरें बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। श्रीमती साहू ने कहा कि इससे पहले भी वर्ष 2013 में अफजल गुरु की फांसी के विरोध के दौरान लगाए गए नारों को लेकर जेएनयू विवादों में रहा है। उनके अनुसार इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि कुछ तत्व शिक्षण संस्थानों का दुरुपयोग कर देश विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक ओर जहां देश में सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई हो रही है और स्थिति नियंत्रण की ओर है, वहीं दूसरी ओर यदि किसी शैक्षणिक संस्थान में अर्बन नक्सल जैसी विचारधारा पनप रही है तो उस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। श्रीमती साहू ने यह भी कहा कि देश विरोधी गतिविधियों के आरोपों से जुड़े मामलों में कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा कथित रूप से बचाव किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा शरजील इमाम और उमर खालिद से जुड़े मामलों में की गई टिप्पणियों और जमानत निरस्तीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की एकता और अखंडता से जुड़े मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जेएनयू प्रशासन द्वारा छात्रसंघ के उपाध्यक्ष गोपिका, कथित अध्यक्ष एवं उनके समर्थकों सहित पांच छात्रों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।श्रीमती साहू ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के नियमों के अनुसार किसी भी शैक्षणिक संस्थान में देश विरोधी गतिविधियों या विचारधाराओं को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। यदि बार-बार इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह न केवल संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि देश की सुरक्षा और एकता के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने अंत में कहा कि जेएनयू सहित सभी शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन, राष्ट्रहित और संवैधानिक मूल्यों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षा के मंदिरों में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को कोई स्थान न मिल सके।
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