राजनांदगांव/डोंगरगढ़। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डोंगरगढ़ प्रवास के दौरान सर्वप्रथम मां बम्लेश्वरी मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की. उन्होंने मां बम्लेश्वरी से देश एवं प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की. इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद संतोष पाण्डेय सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी पूजा-अर्चना की. पूजन अवसर पर पूर्व विधायक रामजी भारती, समाजसेवी कोमल सिंह राजपूत, भावेश बैद, मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, कलेक्टर जितेन्द्र यादव, पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंकिता शर्मा, जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं ट्रस्ट समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे. इसके पश्चात केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान चन्द्रगिरि तीर्थक्षेत्र डोंगरगढ़ स्थित विद्यासागरोदय समाधि स्थल पहुंचे जहां उन्होंने संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर महामुनिराज के द्वितीय समाधि स्मृति महामहोत्सव कार्यक्रम में सहभागिता की. उन्होंने समाधि स्थल पर पूजा-अर्चना कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री द्वारा आचार्य विद्यासागर महाराज के नाम से जारी 210 डाक लिफाफों का विमोचन, भारत सरकार द्वारा जारी चांदी के स्मृति सिक्के का विमोचन, आचार्य विद्यासागर संग्रहालय का शिलान्यास एवं भूमिपूजन तथा पौधरोपण किया गया। सभा को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा किआचार्य विद्यासागर महाराज का स्मरण करते ही करूणा से भरा हृदय और मुस्कुराते हाथों से आशीर्वाद देने वाला स्वरूप स्मरण हो आता है। उन्होंने कहा कि डोंगरगढ़ की पावन धरा पर आकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा हूं. भले ही आज वे हमारे बीच सशरीर उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति का अहसास हर स्थान पर होता है।
उन्होंने कहा कि जैन परंपरा में समाधि को उत्सव के रूप में स्वीकार किया गया है, जो मृत्यु पर विजय का प्रतीक है। आचार्य विद्यासागर महाराज देह में रहकर भी विदेह थे, लोक में होकर भी अलौकिक थे और शिष्यों के लिए साध्य भी थे और साधन भी। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज जहां भी चातुर्मास करते, वह स्थान तीर्थ बन जाता था। उनकी वाणी में सत्य, तेज और ओज था तथा उनकी बुद्धि में सरस्वती विराजमान थी। उन्होंने हिन्दी, संस्कृत और कन्नड़ में अनेक ग्रंथों की रचना की, जिनमें ‘मूक माटी’ अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के दिखाए मार्ग पर चलकर भारतीय संस्कृति, स्वदेशी, राजभाषा हिन्दी के सम्मान और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि डोंगरगढ़ अद्भुत संगम स्थल है, जहां एक ओर चन्द्रगिरि जैन तीर्थ, दूसरी ओर मां बम्लेश्वरी मंदिर और तीसरी ओर प्रज्ञागिरि बौद्ध तीर्थ स्थित है—यह तीन आध्यात्मिक धाराओं का दुर्लभ संगम है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का एक क्षण भी यदि जीवन में आत्मसात कर लिया जाए, तो जीवन सार्थक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चन्द्रगिरि तीर्थ जैन समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल बनेगा। कार्यक्रम में सांसद श्री संतोष पाण्डेय, विधायक डोंगरगांव दलेश्वर साहू, कोमल सिंह राजपूत, पूर्व विधायक रामजी भारती, संजय बडजात्या, मनीष जैन, अशोक जैन सहित जनप्रतिनिधि, जैन समाज के प्रबुद्धजन, स्कूली बच्चे एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंकिता शर्मा ने छत्तीसगढ़ पर्यटन पर आधारित पुस्तक केन्द्रीय मंत्री को भेंट की। भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई ‘मूक माटी ट्रेन’ को प्रतीक स्वरूप प्रदर्शित किया गया। प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं तथा विभिन्न पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।




