खैरागढ़।प्रदेश में कार्यरत मनरेगा (MGNREGA) अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बीते दो माह से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। वेतन न मिलने के कारण हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट और कर्ज की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन और अनुरोध के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है, जिससे रोष लगातार बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कार्यरत मनरेगा कर्मचारियों को नवंबर–दिसंबर 2025 का वेतन अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में पदस्थ ये कर्मचारी अपने निजी खर्च पर फील्ड ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं। आवागमन, मोबाइल, इंटरनेट, भोजन और आवास जैसी मूलभूत जरूरतों का खर्च स्वयं उठाने के बावजूद वेतन न मिलना कर्मचारियों के आत्मसम्मान पर सीधा आघात है। कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करना अब बेहद कठिन हो गया है। इसके बावजूद उनसे लगातार काम का दबाव बनाया जा रहा है।
योजनाओं का भार, पर अधिकार शून्य
विडंबना यह है कि जिन कर्मचारियों के कंधों पर मनरेगा के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), स्वच्छ भारत मिशन, पीएम जनमन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं का सफल क्रियान्वयन निर्भर है, वही कर्मचारी महीनों से वेतन से वंचित हैं।
एचआर पॉलिसी आज तक नहीं
मनरेगा कर्मचारियों के लिए अब तक कोई ठोस सेवा सुरक्षा या मानव संसाधन (HR) नीति लागू नहीं की गई है। अगस्त 2024 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मनरेगा कर्मचारियों के लिए मानव संसाधन नीति तैयार करने हेतु समिति का गठन किया गया था। समिति को 15 दिवस में प्रतिवेदन सौंपना था, लेकिन कई माह बीत जाने के बावजूद नीति अब तक तैयार नहीं हो पाई है।
समय पर वेतन का भरोसा कब?
एक ओर केंद्र सरकार नए श्रम सुधारों और लेबर कोड्स के माध्यम से समय पर वेतन भुगतान की बात करती है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 7 तारीख तक वेतन मिलना सुनिश्चित किया जाना है।
लेकिन छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मचारियों की स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। जब सरकार कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की बात करती है, तो सवाल उठता है क्या यह सम्मान सिर्फ कागजी घोषणाओं तक सीमित है? मनरेगा कर्मचारियों को उनकी मेहनत की कमाई कब मिलेगी, यह आज सबसे बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

