खैरागढ़। शहर का विकास भाषणों और घोषणाओं से नहीं बल्कि ठोस बजट और योजनाओं से होता है. लेकिन नगर पालिका परिषद में पिछले दो वर्षों से विकास का यह आधार ही गायब है. वर्ष 2024 के बाद अब 2026 आ चुका है, फिर भी नगर पालिका का वार्षिक बजट पेश नहीं किया गया जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा चंद्राकर की कार्यशैली पर सवाल उठाता है. हैरानी की बात यह है कि केंद्र, राज्य और नगर पालिका तीनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद बजट जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई निर्णय नहीं हो पाया. बजट के अभाव में शहर की योजनाएं दिशाहीन हो गई हैं और कई विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं. सड़क, नाली, सफाई व्यवस्था, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं सीधे बजट पर निर्भर हैं लेकिन आम नागरिक इसका सीधा खामियाजा भुगत रहे हैं.
नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष दीपक देवांगन ने कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा काग़ज़ों में विकास कार्य का दावा किया जा रहा है लेकिन जमीन पर कहीं विकास दिखाई नहीं देता. पिछले लगभग दो वर्षों से वार्षिक बजट ही पेश नहीं किया गया जबकि पुराने बजट भी अब तक स्वीकृत नहीं हो पाए हैं. इससे शहर का विकास पूरी तरह ठप है और जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है. उन्होंने इतवारी बाजार और टिकरापारा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि निर्माण पूर्ण होने के बावजूद दुकानों का हैंडओवर नहीं किया गया. परिणामस्वरूप स्थानीय व्यापारी बाहर ठेला-खोमचों में व्यापार करने को मजबूर हैं जिससे उनकी आजीविका और शहर की व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रही हैं. श्री देवांगन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दुकानें नहीं दी गईं तो वे सड़क पर उतरकर चक्का जाम करेंगे. नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा चंद्राकर ने बताया कि बजट की तैयारी जारी है और पिछला बजट किसी कारणवश पूरा नहीं हो पाया था।




