खैरागढ़। खैरागढ़ जिले के बफरा गांव से ताल्लुक रखने वाले छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार ज्ञानेश कौशल के आकस्मिक निधन की खबर से पूरे छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग (छलीबुड) और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है बताया जा रहा है कि उनका निधन हृदय गति रुकने से हुआ. उनके असमय चले जाने से न केवल फिल्मी दुनिया, बल्कि उनका गांव और असंख्य प्रशंसक गहरे सदमे में हैं. ज्ञानेश कौशल प्रसिद्ध मानसकार भुवन कौशल के पुत्र थे. कला और संस्कार उन्हें विरासत में मिले थे. बचपन से ही उनमें अभिनय और मंच प्रस्तुति की झलक दिखाई देती थी जिसे उन्होंने समय के साथ मेहनत और लगन से निखारा. सीमित संसाधनों के बावजूद ज्ञानेश ने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर पहचान बनाई. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टिक-टॉक जैसे डिजिटल मंचों से की और धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ी सिनेमा तक का सफर तय किया. उनकी यह यात्रा आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत रही कि अगर जुनून और मेहनत हो तो छोटे मंच भी बड़े सपनों की राह बन सकते हैं. ज्ञानेश ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा के चर्चित कलाकार अमलेश नागेश के साथ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. दोनों न केवल सह-कलाकार थे बल्कि गहरे मित्र भी थे। साथ संघर्ष किया, साथ आगे बढ़े और छलीबुड में अपनी अलग पहचान बनाई। ज्ञानेश के निधन से अमलेश नागेश सहित उनके मित्रों और सहकर्मियों को गहरा आघात पहुंचा है. जैसे ही उनके निधन की खबर बफरा गांव पहुंची पूरे गांव में मातम पसर गया. परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. गांववासी उन्हें सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि अपने बीच से निकले एक होनहार बेटे के रूप में याद कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत के कलाकारों निर्देशकों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संदेशों के माध्यम से गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं सभी का कहना है कि ज्ञानेश कौशल का जाना छलीबुड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। कम उम्र में जो मुकाम उन्होंने हासिल किया वह उन्हें हमेशा यादगार बनाए रखेगा। भले ही आज वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी मेहनत संघर्ष और मुस्कान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.
Loading...




