राजनांदगांव | भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, जहाँ शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की रीढ़ माना जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ राज्य की पेंशन नीति एक गंभीर मानवीय संकट का रूप लेती जा रही है। दशकों तक विद्यार्थियों को शिक्षित करने वाले एल.बी. संवर्ग के शिक्षक आज सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। राज्य सरकार की संविलियन प्रक्रिया और विसंगतिपूर्ण नीतियों ने उनकी 20–25 वर्षों की सेवा को व्यवहारिक रूप से “शून्य” कर दिया है। एक दंपति, एक सत्र और शून्य पेंशन राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड से सामने आया मामला व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करता है। महेन्द्र दास साहू, जिनकी प्रथम नियुक्ति 1 फरवरी 1996 को हुई थी, 30 सितंबर 2025 को प्रधान पाठक पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता साहू, प्रथम नियुक्ति 18 अगस्त 1995, 30 मई 2025 को प्रधान पाठक पद से सेवानिवृत्त हुईं। करीब 30 वर्षों तक शिक्षा सेवा देने वाला यह शिक्षक दंपति आज बिना पेंशन के सेवानिवृत्त जीवन जीने को विवश है। यह केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि राज्य की नीति से उपजी सामूहिक सामाजिक विफलता है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, राजनांदगांव के जिला अध्यक्ष गोपी वर्मा ने बताया कि शासन द्वारा संविलियन की तिथि 1 जुलाई 2018 से सेवा गणना किए जाने के कारण, संविलियन पूर्व की लगभग 20 वर्षों की सेवा को अमान्य मान लिया गया। जबकि सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार 33 वर्ष की सेवा पर पूर्ण पेंशन 10 वर्ष की सेवा पर अनुपातिक पेंशन का प्रावधान है संविलियन के बाद सेवा गणना होने से 1995–1998 में नियुक्त शिक्षक न्यूनतम 10 वर्ष की पात्रता भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि हजारों शिक्षक सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक असुरक्षा, मानसिक तनाव और सामाजिक अपमान झेलने को मजबूर हैं। यह मामला अब केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहा। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और पेंशन देना राज्य का नैतिक व संवैधानिक दायित्व है। जब एक शिक्षक, जिसने तीन पीढ़ियों को शिक्षित किया, बुढ़ापे में पेंशन से वंचित होता है, तो यह भारत की मानवाधिकार और श्रम नीति पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय पदाधिकारी शैलेन्द्र यदु, राकेश तिवारी, जिला पदाधिकारी जीवन वर्मा, हंस मेश्राम, मनोज वर्मा, जिला प्रवक्ता राजेश साहू, संदीप साहू, देवेंद्र साहू, रतिराम कन्नौजे, पंचशीला सहारे, किसन देशमुख सहित ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश कुरेटी, मनीष पसीने, गिरीश साहू, अनिल शर्मा एवं संगठन के समस्त पदाधिकारियों ने इसे राष्ट्रीय कर्मचारी आंदोलन का विषय बताते हुए मांग की है कि सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए संविलियन पूर्व की सेवा को पूर्णतः मान्य किया जाए पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जाए सेवानिवृत्ति पश्चात अंतिम मूल वेतन का न्यूनतम 50% आजीवन पेंशन सुनिश्चित की जाए सभी राज्यों में लागू संविलियन/संविदा से नियमितीकरण की नीतियों की केंद्र स्तर पर समीक्षा की जाए प्रश्न यह है कि जब शिक्षक ही असुरक्षित होंगे, तो देश का भविष्य कितना सुरक्षित रहेगा?
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